यहा लोग दुनिया में दोस्त देखते है,
हम दोस्त में ही दुनिया देखते है।
काश सूखे फूल फिर से खिल जाए,
फिर से वो पुराने दोस्त मिल जाए।
दोस्तो से टूट कर रहोगे तो कुत्ते भी सतायेंगे,
और दोस्तो से जुड़ कर रहोगे तो शेर भी घबरायेंगे।
दोस्ती में बस इतना सा उसूल होना चाहिए,
दोस्तो की हर बाते कुबूल होना चाहिए है।
दो ऊँगली को जोड़ने से दोस्ती हो जाती है,
यही तो दोस्ती की ख़ूबसूरती कहलाती है।
हमारी दोस्ती तो एक-दूजे से ही पूरी होती है,
वरना रास्ते के बिना तो मंज़िल भी अधूरी होती है।
दोस्ती हर चेहरे की मुस्कान होती है,
दोस्ती ही तो सुख-दुःख की पहचान होती है।
हम दोस्ती करते है तो अफसाने लिखे जाते है,
और दुश्मनी करते है तो तारीखे लिखे जाते है।
वो ग्लास ही क्या जिसमें ड्रिंक छूट जाये ,
वो दोस्ती क्या जो लड़की की वजह से टूट जाये।
दोस्ती का फर्ज कुछ इस कदर निभाया जाये,
एक दोस्त रहे भूखा तो दूसरे से भी ना खाया जाये।
इस दोस्ती के नशे में इस कदर मदहोश रहोगे,
कि हर वक़्त फ़िजाओं में इसे महसूस करोगे।
दोस्ती में तो दोस्त, दोस्त का ख़ुदा होता है,
ये महसूस तब होता है जब वो जुदा होता है।
अंदाज ऐसा रखो की दुनिया देखती रह जाए,
और दोस्ती ऐसी करो की दुनिया जलती रह जाए।