वो नाराज हैं हमसे की हम कुछ लिखते नहीं,
कहाँ से लाएं लफ्ज़ जब हमको मिलते नहीं,
दर्द की ज़ुबान होती तो बता देते शायद,
वो जख्म कैसे दिखाए जो दिखते नहीं !

गम को आँसू बनकर बहने न दिया,
कुछ इस तरह मैंने खुद को ठोकरों में भी,
खुद को सम्भाल लिया !

इंसान खुशी में बहक जाता है,
लेकिन धोका खाकर संभल जाता है।

शायरी में सिमटते कहाँ हैं दिल के दर्द दोस्तों,
बहला रहे हैं खुद को जरा फोन के साथ !!

कौन कहता है नफरतों में गम होता है,
कुछ मोहब्बत बड़ी कमाल की होती है ।

कुछ खोने का गम कुछ न पा सकने के,
गम से कहीं ज्यादा होता है !

खुद ही रोए और खुद ही चुप हो गए,
ये सोचकर की कोई अपना होता तो रोने ना देता !

हम भी फूलों की तरह अक्सर तनह रहते है,
कभी टूट जाते है तो कभी कोई तोड़ देता है ।

तू नाराज न रहा कर तुझे वास्ता है खुदा का,
एक तेरा चेहरा देख कर ही तो,
हम अपना गम भुलाते है !

दुनिया भी मिली गम भी मिले है,
वो क्यूँ नहीं मिलता जिसे माँगा था खुदा से !

दर्द बनकर समा गया कोई !
दिल में काँटे चुभा गया कोई !

खुशियों की चाह थी वहां बे हिसाब गम निकले,
बेवफा तू नहीं सनम बद नसीब तो हम निकले !

हर दिन बस खुद से एक ही सवाल होता है,
इन गम भरी आंखों से,
क्या उसे सच में फर्क नहीं पड़ता !

इस शहर में हम जैसा सौदागर कहाँ मिलेगा यारो,
हम गम भी खरीद लेते हैं,
किसी की खुशी के लिए !