मुझे देखकर शर्म से नजरें चुरा लेती है वो,
उसे बेवफा न समझ लूं इसलिए,
चेहरे से जुल्फों को हटा जरा सा मुस्कुरा देती है वो !
तेरे हुस्न का दीवाना तो हर कोई होगा,
लेकिन मेरे जैसी दीवानगी हर किसी में नहीं होगी !
लोग मेरी शायरी की तारीफ कर रहे है !
लगता है दर्द अच्छा लिखने लगी हूं मैं !
अजब तेरी है ऐ महबूब सूरत !
नजर से गिर गए सब खूबसूरत !
देख कर तेरी आँखो को मदहोश मैं हो जाता हूँ !
तेरी तारीफ किये बिना मैं रह नहीं पाता हूँ !
ऐ सनम जिस ने तुझे चाँद सी सूरत दी है,
उसी अल्लाह ने मुझ को भी मोहब्बत दी है !!
मासूम सी सूरत तेरी दिल में उतर जाती है,
भूल जाऊं कैसे मैं तुझे,
तू मुझे हर जगह नजर आती है !
ख्वाहिश ये नहीं की मेरी तारीफ हर कोई करे,
बस कोशिश ये है की मुझे कोई बुरा न कहे !!
तुम्हारे गालों पर एक तिल का पहरा भी जरूरी है,
डर है की इस चहरे को किसी की नजर न लग जाए !!
मुझको मालूम नहीं हुस़्न की तारीफ,
मेरी नजरों में हसीन वो है जो तुम जैसा हो !
अल्फाज खुशी दे रहे थे मुझे और,
वो मेरे इश्क की तारीफ कर रही थी !!
उसने महबूब की तारीफ कुछ इस कदर की,
रात भर आसमान में चाँद भी दिखाई न दी !
अब क्या लिखूं तेरी तारीफ में मेरे हमदम,
अलफाज कम पड़ जाते है तेरी मासूमियत देखकर !