पता नहीं कौन सा जहर मिलाया था,
मोहब्बत में तुमने,
न जिंदगी अच्छी लगती हैं,
ना हीं मौत आती हैं।

कितना दर्द है दिल में दिखाया नहीं जाता,
किसी की बर्बादी का किस्सा सुनाया नहीं जाता,
एक बार जी भर के देख लो इस चहरे को,
क्यूंकि बार बार कफन उठाया नहीं जात !

“इक तुम हो जिसे प्यार भी याद नहीं,
इक में हूँ जिसे और कुछ याद नहीं,
जिन्दगी मौत के दो ही तो तराने हैं,
इक तुम्हें याद नहीं इक मुझे याद नही !

एक मुर्दे ने क्या खूब कहा है,
ये जो मेरी मौत पर रो रहे है,
अभी उठ जाऊं तो जीने नहीं देंगे।

जहर पिने से कब मौत आती है,
मर्जी खुदा की भी चाहिए मरने के लिए !

न जाने किस गुनाह की सजा दे दी,
उसे लिखकर किसी ओर के नसीब में,
मेरे खुदा ने ही मुझे मौत दे दी !

मोहब्बत के नाम पे दीवाने चले आते हैं,
शमा के पीछे परवाने भी चले आते हैं,
तुम्हें याद न आये तो चले आना मेरी मौत पर,
उस दिन तो बेगाने भी चले आते हैं ।

वादे तो हजारों किये थे उसने मुझसे,
काश एक वादा ही उसने निभाया होता,
मौत का किसको पता कि कब आएगी,
पर काश उसने जिन्दा न जलाया होता !